सेठाणी री समझदारी
घणा सालां पैल्या मारवाड़ देश में एक गाँव होतो। गाँव में एक सेठ रहतो हो। सेठ बहुत धनवान हो, पण दिल सूँ सादा और नेक हो। सेठाणी भी बड़ी समझदार और सयाणी औरत हो।
एक दिन सेठ काम सूँ बाहर गयो। घर में सेठाणी और नोकर रह गया। उसी दिन एक ठग सेठ रो रूप धर के घर आयो। बोळो—
“मैं सेठ रो दोस्त हूँ, सेठ ने मने भेज्यो है। थोड़े रूपया-गहणा देजो।”
सेठाणी समझ गई कि सेठ बिना खबर भेजे कुछ भी न करावे। सेठाणी बोली—
“पहले आप खाट पै बैठो, पानी पीयो।”
सेठाणी ने नोकर नै इशारो कियो और चुपचाप गाँव रा चौकीदार नै खबर भेज दी। सेठाणी ठग सूँ बातां करती रही, ऊं नै मीठो दूध पिलायो।
थोड़ी देर में चौकीदार और गाँव रा लोग आ गया। ठग घबरायो और भागण लाग्यो, पण पकड़ाय गयो। सबने सेठाणी री अक्ल री तारीफ करी।
शाम ने सेठ आयो तो सारी बात सुणी। सेठ बोल्यो—
“धन तो आवे-जावे, पण समझदारी और होशियारी सदा काम आवे।”
सीख:
अक्ल और धीरज सूँ बड़ा सूँ बड़ा संकट टळ जावे।
ढोला–मारू री प्रेम कथा
मारवाड़ देश में ढोला नाम रो एक राजकुमार होतो और मारू नाम री सुंदर राजकुमारी हो। दोनों बचपन में ही सगाई हो गई, पण समय बीत गयो और ढोला राज-काज में फंस गयो।
मारू दिल सूँ ढोला नै याद करती रही। एक दिन ढोला री याद में मारू ने एक सन्देसो भेज्यो—
“ढोला, वचन याद रखजो।”
ढोला ने सन्देसो पायो तो ऊं नै अपनी भूल समझ में आई। ऊं रे मन में प्रेम जाग्यो और मारू नै लिवाण खातर ऊं रे देश सूँ निकळ गयो।
रास्ता में रेगिस्तान, प्यास, आँधी–तूफान आवे, पण सच्चा प्रेम हार मानै कोनी। आखिरकार ढोला मारू नै मिल्यो। दोनों रो मिलण सच्चे प्रेम और भरोसे री मिसाल बन गयो।
सीख:
सच्चो प्रेम समय और कठिनाई सूँ डरै कोनी।
पाबूजी री फड़ (वीरता री कथा)
पाबूजी मारवाड़ रो महान वीर और लोकदेवतो हो। ऊं ऊँटां और ग्वालां रो रक्षक मान्यो जावे।
एक बार एक चारण री गायां लुट गयो। चारण ने पाबूजी सूँ मदद मांगी। पाबूजी ने वचन दियो—
“मैं गायां नै वापस लाऊँ।”
पाबूजी रो ब्याह होवाण लाग्यो हो, पण वचन निभावण खातर ऊं ने ब्याह छोड़ी दियो और लड़ाई खातर निकल गयो।
पाबूजी ने गायां तो छुड़ा ली, पण लड़ाई में वीरगति पाई। आज भी लोग पाबूजी नै सच्चे वचन और बलिदान रो देवता मानैं।
सीख:
वचन और धर्म जीवन सूँ भी बड़ा होवे।
तेजाजी री कथा (सच्चाई और न्याय री कहानी)
तेजाजी मारवाड़ रो प्रसिद्ध वीर और लोकदेवतो हो। ऊं सच्चाई और न्याय खातर जानो जावै।
एक दिन तेजाजी ने साँप नै वचन दियो कि ऊं वापस आवेगा। सबने मना कियो—
“साँप काट लेसी।”
पण तेजाजी ने वचन निभायो। ऊं वापस आयो और साँप नै बोलीयो—
“मैं आयो हूँ, काटजो।”
साँप भी तेजाजी री सच्चाई देख के दंग रह गयो और ऊं नै देवता मान लियो। आज भी लोग साँप काटे में तेजाजी नै याद करैं।
सीख:
सच्चाई और वचन निभावण सदा सबसे बड़ी ताकत होवे।
No comments: